घोषित उम्मीदवारों की पांच विधानसभा में लगी आग, जमीनी कैडर निराश 
कार्यकर्ताओं ने कहा पहले भाजपा को ही मुक्त कराना होगा फिर कांग्रेस की सोचेंगे
कुछ जोगी की शरण में तो कुछ ने घर में सफाई का बीड़ा उठाया

जिले में पांच विधानसभा के लिए प्रत्याशी घोषणा से चकित कार्यकर्ताओं का आक्रोश चरम पर है | रायशुमारी,सर्वे,पैनल जैसे शब्दों के भ्रमजाल को काटने पर आमादा फौज को शांत करने के लिए संगठन पर्याप्त नहीं है | पार्टी में बगावत, बागी या असंतुष्ट जैसे शब्दों से भी कार्यकर्ता परहेज कर रहे हैं उनका साफ कहना है यह मुक्ति अभियान है ताकि कार्यकर्ताओं का मान बढ़ सके तथा पार्टी का गौरव बरकरार रहे| वे संकेत दे रहे हैं कि पार्टी में बोझ बन रहे पराजित या कार्यकर्ताओं की अवहेलना करने वाले सत्ता भोगी मानसिकता से भरे आत्ममुग्ध पूर्व योद्धाओं से जंग नहीं जीती जा सकती | खेत में खरपतवारों को पोषित करना हरी लहलहा रही फसल को बर्बाद ही करेगी| जांजगीर चांपा जिले की पांच विधानसभाओं के साथ प्रदेश के कई हिस्सों में भाजपा बुरी तरह जूझ रही है |यह आक्रोश समय के साथ बढ़ता चला जा रहा है |जिले में भी सभी विधानसभाओं में बैठकों का दौर चल रहा है, अगले चौबीस घंटों में कई ऐसे फैसले हो सकते हैं जो बीजेपी के लिए संकट का कारण बन सकते हैं |

अंदाजा नहीं था ऐसा होने का

अधिकांश कार्यकर्ताओं को ये अंदाजा नहीं था कि दूसरे चरण के सीटों की घोषणा इतनी जल्दी होगी |उनके लिए घोषणा और चयन दोनों ही अप्रत्याशित और हताशाजनक रहा | कांग्रेस की बढ़ती ताकत और जोगी बसपा युति के चलते टिकट वितरण में सावधानी और कडे मापदंडों वाली चयन प्रक्रिया की उम्मीद थी पर प्रत्याशियों की घोषणा छत्रपों के सामने नतमस्तक संगठन के अलावा कुछ नहीं है, इसी से कार्यकर्ताओं में भारी निराशा है | इससे ये साफ नजर आ रहा है कि बीजेपी विकल्पों पर विचार करने के मूड में ही नहीं थी|

चंद्रपुर में संयोगिता जूदेव पर आपत्ति राज्य की महिला विंग द्वारा ही लगाये जाने की खबर आम थी, जो भाजपा के 14 महिला प्रत्याशी के दावे को झुठलाती है तब जबकि एकमात्र मंत्री की टिकट काटी वो भी महिला ही है | परफॉर्मेंस में कई और मंत्री तो उनसे भी कमजोर थे | सक्ती से युवा विधायक की टिकट काटकर बीजेपी ने कांग्रेस के लिए राह आसान ही की है जबकि वहां और विचार मंथन की आवश्यकता थी | सक्ती से ज्यादा तो विरोध पामगढ़ में था पर अंडर परफॉर्मेंस संसदीय सचिव बरकरार रहे | यहां से सांसद कमला देवी के रुप में दमदार विकल्प मौजूद था | एक ओर जहां एक हार फिर जीत के सिलसिले के तहत नारायण चंदेल फिर टिकट लाने में सफल रहे तो ये फार्मूला अकलतरा में दिनेश सिंह के लिए काम नहीं आया जबकि अकलतरा में भी यही देखा गया है | नारायण के आने से चांपा शहर का इंतजार 25 साल का हो जायेगा, इस बार वहां काफी उम्मीदें बांधी जा रही थी | वहीं बीजेपी का परंपरागत वोटर रहा सामान्य वर्ग भी निराश हो गया | अकलतरा में पार्टी से लंबे अरसे से जुड़े कार्यकर्ता नाराज हैं जिस रियासती मिजाज को सबक सीखाने भाजपा को जनता चुनती आ रही है वह भी खतम होने लगी है | मतदाताओं ने कई बार आम जनता के बीच से आए प्रत्याशी को चुनकर मालगुजारी को नकारा है | हालांकि इन सभी सीटों पर सियासी समीकरण के हिसाब से स्वयं के दम पर मजबूत प्रत्याशी चुनकर भाजपा ने सुरक्षित दांव खेलने की कोशिश की है | कार्यकर्ताओं की ऐसी फौज पर भरोसा किया गया है जो हुकुम पर काम करती है ना कि पार्टी संगठन के आधार पर | यानि अब निजी निष्ठा वाली फौज और सिर्फ पार्टी निष्ठा वाले कैडर आमने सामने हैं | कार्यकर्ताओं का आक्रोश पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र के दावे की परीक्षा लेने वाले हैं और सामूहिक सर्वमान्य निर्णय लेने की विशेषता को परखने की चुनौती है

दूसरा पहलू देंखे तो जैजेपुर के कार्यकर्ता बीजेपी द्वारा प्रत्याशी घोषित नहीं करने से नाराज हो गये, वहां भी अंदाजा यही लगने लगा है कि किसी छत्रप या उसके कारिदें को चुन लिया जायेगा | इस आशंका से ही वहां भी विरोधी सुर उठने लगे हैं | कुल मिलाकर अगले कुछ दिनों में होने वाली हलचल चुनावी तापमान को बढ़ाने वाली है |

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