स्टिंग ऑपरेशन की छाया नमूदार, अंदरुनी हालातों पर झूठ से परेशान आम कांग्रेसी 

सर्वे इस पर हो कि कांग्रेस जीतना चाहती है या नहीं भड़के कार्यकर्ता बोले

जीत की बंधी आशाओं पर पानी फेरने से बाज आए बडे़ नेता 

एक कांग्रेस कमेटी ही काफी है वरना सैकड़ों बना लो क्या काम की?

पीएल पुनिया, भूपेश बघेल, चरणदास महंत, अरविन्द नेताम सहित  सात वही नाम जो कई कमेटियों में पहले थे कांग्रेस की नयी कोर कमेटी में भी हैं |

कांग्रेस का कार्यकर्ता जो बहुत बारीक मार्जिन से सरकार बनाने में चूकने का दर्द पाल रहा है उसे इन कोर कमेटी की नोक से कुरेदा जाना अब नाकाबिलेबर्दाश्त हो रहा है | कार्यकर्ता यह सोच रहा है कि एकता का गीत गाते गाते उनके नेता चीरफाड़ में उतर आए हैं | इस बार छत्तीसगढ़ में संभव लगती जीत की आशाएं इस गुटबंदी से ध्वस्त होती दिखने लगी हैं |

फिर नई कोर कमेटी 

एआईसीसी की बैठक जहां से कार्यकर्ता उम्मीदवारी की पहली सूची के लिए टकटकी लगाकर इंतजार में थे वहां से सात सदस्यीय कोर कमेटी की सूची आ गई | इस कमेटी में पूनिया, बघेल, सिंहदेव, महंत, नेताम, ताम्रध्वज और कमला मनहर हैं | यह कमेटी राज्य के फैसले लेगी | संदेश यह है कि कोई भी नेता अकेले कुछ नहीं कहेगा या करेगा | कार्यकर्ता सोच रहा है कि पहले भी तो यही लोग थे जो कमेटियों के मुखिया थे |

ये कवायद सीधे सीधे बघेल के स्टिंग ऑपरेशन के बाद उपजे हालात की ओर इशारा कर रहे हैं | जिस पर दिल्ली में बैठक हो चुकी है | इस बैठक से बाहर निकलते पूनिया, धनेन्द्र और रविन्द्र के आत्ममुग्ध और भूपेश के झुके कंधे सबने देखकर ही मजमून भांप लिया था | उस समय पूनिया के कैमरों के सामने बयान के वक्त की बॉडी लैंग्वेज कुछ और ही बता गई थी जिसकी परिणिति आज हुई| संकेत साफ हैं कि सीटों का बंटवारा बराबर बराबर हो रहा है | वही चेहरे आने वाले हैं जो पहले भी रहे हैं | कांग्रेस में बदलाव का नारा महज एक नारा है | लेकिन कार्यकर्ताओं ने आस नहीं छोड़ी है क्योंकि वे मानते हैं कि ये कांग्रेस है और कांग्रेस में कभी भी कुछ भी हो सकता है और कभी कभी तो अच्छा भी हो जाता है |

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