फाइल फोटो

बघेल सीडी पॉलिटिक्स के शिकार ? 

आलाकमान अब तीखे तेवर नहीं चाहता ? 

   सुधार – समझौते की राह पर कांग्रेस?

महंत सहित कई नेताओं को आनन फानन में दिल्ली बुलाने की खबरों ने ये तमाम प्रश्न चिन्ह पैदा कर दिए हैं | दिल्ली दरबार जल्द ही फैसला करने वाला है | सूत्र बताते हैं कि अगले २४ घंटे भूपेश बघेल के लिए राजनीतिक रुप से दुष्कर हैं | बताया जा रहा है कि वोरा, पुनिया, ताम्रध्वज और भुवनेश्वर कलिता सहित प्रदेश के आला नेता दिल्ली में हैं | राहुल गांधी जबलपुर के दौरे पर हैं, उनके वापस आने पर फैसला हो सकता है 

इन घटनाक्रमों के संकेत नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव के बयानों से भी मिलते हैं जिसमें जोगी से समझौते से आलाकमान के निर्देश पर भी इंकार की बात कही गई थी | यानि कांग्रेस अब पिछले दो बार से जारी रणनीति पर लौटने की कोशिश में है | समझौतों के लिए सबसे आसान रास्ता डॉ चरण दास महंत को कमान सौंपने का है | राज्य कांग्रेस इस वक्त अपने नेताओं के व्यक्तिगत पसंद नापसंद के बीच झूल रही है | एक नीतिगत निर्णय का अभाव स्पष्ट रुप से दिख रहा है | प्रदेश प्रभारी पी  एल पुनिया, मोतीलाल वोरा और चरणदास महंत एक तरफ और भूपेश टी एस सिंहदेव दूसरी तरफ नजर आ रहे हैं | संकेत यह भी है कि जोगी का दांव चल गया है | इसी उहापोह में निर्णय प्रक्रिया मंद हो गई है |

फाइल चित्र

कलिता पुनिया का दांव वोरा साहू की स्वीकृति 

ऐसा भी नहीं है कि महंत ही एकमात्र पसंद है इससे ज्यादा महंत मजबूरी हैं , जोगी मायावती गठबंधन के बाद कांग्रेस और भाजपा ओबीसी लॉबी को नाराज नहीं करना चाहती ऐसे में महंत ही माकूल दिख रहे हैं जिनकी राजनीति दो दो हार के बाद भी चल ही रही है |

खबर यह भी है कि ताम्रध्वज साहू ने टिकट वितरण के लिए बनाई गई सूची को लेकर डॉ महंत को आड़े हाथों लिया है और कांग्रेस के हार की दिशा में कदम बताया है | यह भी एक कारण हो सकता है कि डॉ महंत को दिल्ली तलब किया गया हो|

फिलहाल कहा यह जा रहा है कि सबसे बडा कारण वो सीडी है जिसमें यह दावा किया जा रहा कि कांग्रेस के टिकट के लिए सौदेबाजी हो रही है वो भी प्रदेश प्रभारी के किसी कथित सीडी के एक्सचेंज के लिए | आलाकमान ने इस घटना को गंभीरता से लिया है जिससे प्रदेश में नेतृत्व को लेकर कई संभावनाएं और आशंकाएं बढ़ी हैं |

 

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